Khatu Shyam Ji Mandir की पूरी जानकारी | खाटू श्याम की कहानी

khatu shyam ji mandir

नमस्कार मित्रो, सबसे पहले “जय बोलो खाटू श्याम दरबार की जय“। क्या आप खाटू श्याम मंदिर (Khatu Shyam Ji Mandir) के बारे में जानकारी लेना चाहते है? यदि आपका जवाब हां है तो यहाँ बने रहे। इस Post में आपको Khatu Shyam Ji का जन्म के बारे में, खाटू श्याम जी मंदिर जगह, खाटू श्याम जी कैसे प्रदिद्ध हुए, खाटू श्याम जी मंदिर आरती का समय, खाटू श्याम जी मंदिर Contact number और इससे जुडी बातो के बारे में जिक्र करने वाले है।

Note: हमने आपको यहाँ केवल हिंदी में जानकारी दी है क्योकि 99% लोग Hindi भाषी ही आते है या इसके बारे में जानना पसंद करते है ।

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खाटू श्याम कौन है ?

लगभग सभी बुड्ढे, जवान लोग, बच्चे, जवान उम्र के लड़के और महिलाये खाटू श्याम के बारे में परिचित है और जाना चाहते है, बहुत सारे ऐसे लोग है जो महीने के महीने या हर 7 दिन में खाटू श्याम के जाते है और यहाँ तक की एक कथन “हारे के सहारा बाबा खाटू श्याम हमारा” लगभग ऐसा बहुत प्रचलित है और WhatsApp Status पर लगते देखा है लेकिन क्या आप Khatu Shyam Ji के बारे में जानते है? बहुत कम ही ऐसे लोग है जो पूरी तरह से जान पाते है तो चलिए कोई बात नहीं हम आपको पूरी तरह से जानकारी करवाएंगे।

खाटू श्याम दो सब्दो से मिलकर बना है जिसमे Khatu मतलब नगर से है और Shyam मतलब वरन यानी रंग से है यानी श्री कृष्ण से है। इससे सिद्ध होते है खाटू श्याम का संबंध श्री कृष्ण भगवन से है। खाटू श्याम का दूसरा नाम बर्बरीक है। आखिर कौन था बर्बरीक? बर्बरीक पांडव पुत्र भीम के पुत्र घटोत्कच का पुत्र जिसका ही नाम बर्बरीक थे। इनकी माता का नाम हिडिम्बा था। बर्बरीक पुरे विश्व में धनुर्विधा में सर्वश्रेस्ट था और उसके तरकश 3 बाण की काफी थे बड़े से बड़े राक्षश या सेना की बड़ी से बड़ी भीड़ को हराने के लिए।

कैसे बने बर्बरीक से खाटू श्याम और कैसे बना Khatu Shyam Ji Mandir

जब कौरवो और पांडवो के बीच महाभारत का युद्ध होने जा रहा था जब बर्बरीक कौरवो और पांडवो के सेना के बीच बिंदु पीपल के पेड़ के निचे जाते है और घोसना करते है की इस युद्ध में जिसकी हार होने वाली होगी उनकी तरफ से में घटोत्कच पुत्र बर्बरीक लडूंगा।

पांडवो की तरफ श्री कृष्ण थे। भगवन श्री कृष्ण को सब कुछ पता था की इस युद्ध में कौरवो का पलड़ा नीचे रहने वाला है और शर्त के मुताबिक अगर बर्बरीक उनकी तरफ से लजा तो पांडवो की पराजय निश्चित है। श्री कृष्ण ने भीम के पुत्र बर्बरीक को बोलै की अगर तुम इतने बड़े धनुर्धर हो तो इस पीपल के पेड़ पर जितने पत्ते है उन सभी को एक ही बाण से छेदकर दिखाओ तब मानूंगा और एक भी पत्ता रहना नहीं चाइये।

श्री कृष्ण की आज्ञा पाकर वह तरकस से बाण निकालता है और तान देता है वृक्ष की और। सारे पते में छेद कर देता है बाण लेकिन इसी बीच एक पत्ता निचे गिर जाता है और झट से श्री कृष्ण उस पत्ते पर पैर रख देखे है लेकिन वह बाण आकर श्री कृष्ण के पैर के पास आकर रुक जाता है और बर्बरीक बोलता है हे प्रभु अपना पैर हटाए जो आपके पैर के निचे पत्ता पड़ा है अभी छिदना बाकी है वह आपके पैर को पार नहीं करेगा क्योकि मैंने उसको केवल पात को छेदने का आदेश दिया है और जैसे ही श्रीं कृष्ण पैर हटते है पात के पार हो जाता है बाण।

Timetable Dekhe: Jaipur To Khatu Shyam Ji Bus Time Table

बर्बरीक का चमत्कार देखकर श्री कृष्ण भी चिंतित हो गए और उन्होंने एक नयी योजना बनायीं और सायकल को ब्राह्मण का भेष बदलकर बर्बरीक के कम्प में पहुंच गए और उसी टाइम बर्बरीक उठ कर बोलै बोलिये ब्राम्हण देवता कैसे पधारे आप यहाँ और क्या चाइये आपको इसी बीच कृष्ण बोल उठे की क्या जो मांगूंगा वो दोगे.

बर्बरीक: जी ब्राम्हण देवता बेझिझक मांगिये आपको क्या चाइये।
ब्राम्हण: मुझे तुम्हारा शीश किये क्या दे पाओगे

ब्राम्हण की बातो को सुनकर बर्बरीक ने बिना परवाह किये शीश काटने का वचन दे दिया और कुछ क्षण बाद अपना सर काटकर कृष्ण को समर्पित कर दिए। श्री कृष्ण ने अपने अश्ली रूप में आकर इतने बड़े बलिदान को देखकर बर्बरीक को वचन दिया की कलयुग में तुम मेरे नाम यानी श्याम नाम से पूजे जाओगे।

शीश मांगने के अगले दिन बर्बरीक ने नहाया और फाल्गुन शुल्क द्वादशी को अपना शीश को काटा था।
बर्बरीक के तरकश में तीन बाण ही क्यों रखता था.

बर्बरीक देवी का उपासक था तो देवी ने उसको वचन दे रखा था जिसके कारण उसके पास तीन बाण थे और वह तीनों बाण किसी भी चीज को भेजने के बाद में उसके तरकश में वापस आकर रख जाते थे बर्बरीक अपने पिता से भी जायदा बलवान था उसको हरा पाना लगभग असंभव था।

खाटू श्याम मंदिर

Khatu Shyam Ji Mandir राजस्थान के सीकर जिले में रींगस से लगभग 5.4 किलोमीटर की दुरी पर है और सीकर बस स्टैंड से 52 किलोमीटर की दुरी पर, जयपुर में सिंधी कैंप बस स्टैंड से खाटू श्याम जी 67.4 किलोमीटर की दुरी पर है। खाटू श्याम मंदिर तक जाने के लिए आप खाटू श्याम मंदिर से लगभग 1 किलोमीटर पर पार्किंग है वह गाड़ी खड़ी करनी पड़ेगी उससे आगे आप गाड़ी नहीं ले जा सकते है।

खाटू श्याम मंदिर का बनने का कारन

बर्बरीक का शीश श्री कृष्ण ने खाटू नगर में दफनाया था जिसका वर्तमान नाम खाटू है जो की राजस्थान के सीकर जिले में है जहा खाटू श्याम मंदिर बना हुआ है. उसके बाद एक गाय जहा शीश दफनाया गया था वह आकर कड़ी होती थी अपने आप उसके स्तनों से दुग्ध की धारा निकलती थी उसके बाद लोगो ने वह खुदी की तो खुदाई में शीश निकला जिसको एक ब्राम्हण को समर्पत किया गया। उसी ब्राम्हण को स्वपन में वही जगह पर मंदिर बनाने का आदेश मिला उसके बाद मंदिर का काम शुरू कर दिया और शीश को कार्तिक माह की एकादशी को स्तापित किया और इसी दिन खाटू श्याम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता हैं।

खाटू श्याम जी का मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है लेकिन वर्तमान समय में मंदिर के आधारशिला 1720 में रखी गई हमारे इतिहासकार पंडित झाबरमल शर्मा के अनुसार 1679 में औरंगजेब और उसकी सेना ने इस मंदिर को नष्ट कर दिया था वैसे मंदिर की रक्षा के लिए अनेक राजपूत ने अपना प्राणों का बलिदान भी दिया था

खाटू श्याम जी का मेला कब मनाया जाता है

खाटू श्याम जी का मेला मंदिर के परिसर में हिंदू मास फागुन में शुक्ल सष्ठी से बारस तक मनाया जाता है और ग्यारस का दिन मेले में बहुत खास दिन होता है

Khatu Shyam Ji Mandir Contact Number

01576-231182, 01576-231482 (For Inquiry Mandir Time, Aarti Time, not booking)

Khatu Shyam Mandir Government Official Website: https://www.tourism.rajasthan.gov.in/khatu-shyam-temple.html

FAQ

खाटू श्याम जी की माँ का नाम क्या है?

खाटू श्याम जी श्याम कुंड से उत्पन हुए थे श्री कृष्ण के कहे अनुसार उन्होंने शीश काटकर अपना बलिदान दे दिया था उनका नाम बर्बरीक था और माता का नाम हिडिम्बा था जोकि घटोत्कच की पत्नी और कुंती पुत्र भीम की पुत्रवधु थी।

Sikar से Khatu Shyam Ji के Train में कैसे जाये?

सीकर से खाटू श्याम जी के लिए 6 Train चलती है जो Laxmangarh, Sikar से रवाना 06:21, 15:37, 16:06, 17:41, 17:41, 21:47 होगी और Ringus Railway Junction पर छोड़ेगी। Ringus Railway Junction से Khatu Shyam Ji Mnadir की दुरी 5.2 किलोमीटर है यहाँ से बस या टेक्सी आराम से मिल जाएगी।

Jaipur से Train में Khatu Shyam Ji कैसे जाये?

जयपुर से खाटू श्याम टेम्पल के लिए बहुत साड़ी Trains जाती है Trains के बारे में अधिक जानकारी, बुकिंग, या टाईमटेबल की जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे: जयपुर से खाटू श्याम ट्रैन

Sikar बस स्टैंड से Khatu Shyam Ji कितना दूर है?

Sikar बस स्टैंड से Khatu Shyam Ji Mandir 52.0 किलोमीटर की दुरी पर है। सीकर से बस या ट्रैन द्वारा खाटू श्याम के लिए यात्रा कर सकते है।

Jaipur से Khatu Shyam Ji कितना दूर है?

जयपुर से कटु श्याम जी मंदिर लगभग 68.8 किलोमीटर की दुरी पर है। खाटू श्याम जी का मंदिर एक भव्य मंदिर है पुरे देश भर से टूरिस्ट यहाँ दर्शन करने आते है।

जयपुर से खाटू श्याम जी कैसे जाये ?

जयपुर से खाटू श्याम जी के लिए बस और ट्रैन दोनों साधन अवेलेबल है तो किसी एक साधन का चयन करके ट्रेवल कर सकते है। बस द्वारा यात्रा करने के लिए राजस्थान रोडवेज की बस Sindhi Camp Bus Stand से लगती है और खाटू श्याम मोड, रींगस को जाती है। रींगस से आप पैदल या बस द्वारा जा सकते है रींगस से Khatu Shyam Ji Mandir 5.2 किलोमीटर की दुरी पर है।

हारे का सहारा खाटू श्याम को क्यों कहते है?

खाटू श्याम जी पहले वाला जन्म नाम बर्बरीक दुनिया का सर्वश्रेस्ट धनुर्धर था महाभारत सुरु होने से पहले वह अपनी माँ को वचन देकर गया था की जिसकी हार होने वाली होगी में उसके साथ हु इसलिए खाटू बाबा को हारे का सहारा कहा गया है।

खाटू श्याम जी की उत्पति कैसे हुई?

खाटू श्याम की उत्पति उसके महाभारत समय के जन्म उस टाइम नाम बर्बरीक था श्री कृष्ण को शीश काटकर दे दिया था जिसको देखते हुए श्री कृष्ण ने वरदान दिया था की कलयुग में तुमको मेरे नाम से यानी श्याम नाम से पूजा जायेगा। महाभारत बर्बरीक को दिखने के बाद उसके शीश को खाटू नगर में दफनाया गया था जहा खाटू श्याम मंदिर बना हुआ है।

खाटू श्याम जी का मंदिर कहा है?

Khatu Shyam Ji Mandir राजस्थान के सीकर जिले में है और रींगस से लगभग 5.2 किलोमीटर की दुरी पर है।

खाटू श्याम जी के पिता कौन थे?

खाटू श्याम के पिता का नाम घटोत्कच थे। खाटू श्याम का नाम बर्बरीक था और बर्बरीक कुंती पुत्र भीम के पौत्र थे ।

खाटू श्याम जी का दूसरा नाम क्या है?

खाटू श्याम का पूर्व नाम यानी पूर्व जन्म नाम बर्बरीक था

खाटू श्याम की पत्नी का नाम क्या था?

खाटू श्याम की पत्नी का नाम मोरवी था। मोरवी खाटू श्याम के पूर्व जन्म बर्बरीक की पत्नी थी।

पूरा महाभारत कौन देखा था?

महाभारत को पूरा बर्बरीक ने दिव्य दृष्टि देख लिया था अपने कटे हुए शीश से

बर्बरीक का धड़ कहा है?

हिसार के बीड़ गांव में बरगद के पेड़ के नीचे

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